अभी कुछ दिनों पहले की बात है | बड़ी मुश्किल से ऑफिस से जान बचाकर दो महीने बाद अपने घर गया था | सभी दोस्तों से मिला वह और बहुत अच्छा लगा | एक जगह बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ और दुनिया जहाँ की बाते की | तभी अचानक मेरा एक दोस्त बोला – “यार तू मोटा हो गया है |”
मैंने मौके की नजाकत को भांपा और मुस्कुराते हुए अपनी छोटी सी प्यारी सी तोंद पर बड़े ही गर्व से हाथ घुमाया और कहा –” भाई ये तो निशानी है खाते पीते घर के लोगो की |”.
फिर वो हमे समझाने लगा – “अरे नहीं यार !! थोडा वाक किया कर | “
मैंने कहा — “वो तो मैं रोज ही करता हूँ |”
वो बोला — ” फिर भी दुबला नहीं हो रहा, क्या बात है !!!”
हमने मजाक में कहा — “कौन कमबख्त दुबला होने के लिए वाक करता है | हम तो वाक करते है की वाक करती हुई लडकियों के देख सके और उनको देखते देखते और ज्यादा खां सके |”
सब हसने लगे और बात आई गयी हो गयी |
शाम को वापस घर आया तो मम्मी ने खाने को कहा | मैंने बताया की लोग मुझे मोटा कहने लगे है | वैसे तो सभी की मम्मी एक जैसी होती है, उनको हमेशा ही अपना लाल कमजोर, कुपोषित और दुबला ही लगता है | ये अलग बात है की जमाना हमे देखकर जल जाता है | मम्मी ने कहा सब गलत बात है और हमे प्रमाणित कर दिया की हम मोटे नहीं है | साथ ही एक काला धागा भी बांध दिया ताकि हमे किसी भी दुबले पतले आदमी की नज़र न लगे !!!
hehehehe….
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खाते पिटे घर…
वैसे ये तो सही है माँ को बच्चे हमेशा कमजोर ही दीखते हैं.
By: Brajmohan Kumar on May 20, 2010
at 1:05 pm
Corrected…
By: BrajMohan Singh on May 20, 2010
at 1:17 pm
good!
maja aya padh ke
By: Kushal Dave on May 21, 2010
at 6:37 am
Nicely written…short and to the point…of course the point here is the tummy of people like us who just love eating…sleeping…recursively
By: paxy on May 26, 2010
at 12:46 pm
And this may be the reason people think that software engineers dont work hard.
By: BrajMohan Singh on May 26, 2010
at 1:20 pm