हज़ार किस्सों में एक कहानी मेरी भी,
मैं जिसका हूँ दीवाना, काश बने वो दीवानी मेरी भी,
यु तो लिए फिरती है चाहत का समंदर दिल में वो,
मिलने को बेताब है उससे नदिया तूफानी मेरी भी,
मेरी ख़ुशी में छलके उसकी आँखें,
उसके गम पे आये आँखों से पानी मेरी भी,
जो हस दे तोह फिजायें चमन हो जाये,
जो छू ले तो आये रग रग में रवानी मेरी भी,
है मालूम न कटेगा उसके साथ बुढ़ापा मेरा,
इस खलिश ने कर दी बर्बाद जवानी मेरी भी,
छोटी तकरार में साथ छोड़ दें, इतने हम खुद्दार नहीं,
वक़्त से पहले अलग हुए, बस इतनी थी नादानी मेरी भी,
थोड़ी अजनबी थोड़ी जानी- पहचानी सी लगती है,
तुमसे मिलती जुलती ही है कहानी मेरी भी,
अब भी अक्सर जूझता रहता हूँ मै उसकी यादों से,
उसने भी शायद रखी होगी कुछ ऐसी निशानी मेरी भी,
उसकी जुदाई से यहाँ समुन्दर भी वीरान है,
वरना पार लग ही जाती वो कश्ती तूफानी मेरी भी,
वक़्त गुजर गया लेकिन आज भी रोता हूँ अकेले में,
क्या प्यार इतना भी न था, कि ले जाती जिंदगानी मेरी भी !!!
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